अगर आपके पीरियड्स किसी महीने जल्दी आ जाते हैं और अगले महीने आते ही नहीं, तो आप अकेली नहीं हैं। अनियमित मासिक चक्र उन सबसे आम वजहों में से है जिनके लिए महिलाएँ स्त्री-रोग विशेषज्ञ के पास जाती हैं, और कई मामलों में कारण अस्थायी और आसानी से इलाज होने लायक़ निकलता है। साथ ही, आपका मासिक चक्र आपकी समग्र सेहत का एक सच्चा संकेतक है, इसलिए बार-बार दोहराता पैटर्न महीनों की चुपचाप चिंता नहीं, बल्कि सही ध्यान माँगता है।
इस लेख में हम देखेंगे कि डॉक्टर असल में किसे अनियमित पीरियड कहते हैं, इसके सबसे आम कारण क्या हैं, तनाव, पीसीओएस (PCOS) और थायरॉइड (Thyroid) की समस्याओं समेत, और वे संकेत कौन-से हैं जो बताते हैं कि अब जाँच करा लेने का समय आ गया है।
अनियमित पीरियड किसे कहते हैं?
एक सामान्य मासिक चक्र 21 से 35 दिनों का होता है, एक पीरियड के पहले दिन से अगले पीरियड के पहले दिन तक गिना जाता है। महीने-दर-महीने कुछ दिनों का हेर-फेर सामान्य है, और शायद ही कोई महिला हर बार घड़ी की तरह नियमित चलती हो। डॉक्टर पीरियड्स को आमतौर पर तब अनियमित मानते हैं जब चक्र लगातार 21 दिनों से छोटा या 35 दिनों से लंबा हो, पीरियड्स पूरी तरह ग़ायब हो जाएँ, या दो पीरियड्स का अंतर बार-बार बेतरतीब ढंग से बदलता रहे। असामान्य रूप से ज़्यादा या बहुत कम रक्तस्राव, या सात दिनों से लंबा चलने वाला पीरियड भी ऐसा बदलाव है जिस पर बात होनी चाहिए। पीरियड-ट्रैकिंग ऐप या कैलेंडर पर दो-तीन महीने सिर्फ़ तारीख़ें दर्ज करते रहना ही आपके डॉक्टर को सचमुच काम की जानकारी दे देता है।
तनाव और जीवनशैली में बदलाव
ओव्यूलेशन (Ovulation) को नियंत्रित करने वाले हार्मोन आपकी बाक़ी ज़िंदगी के प्रति हैरान कर देने की हद तक संवेदनशील होते हैं। परीक्षा का दबाव, काम की डेडलाइन, घर का तनाव, नाइट शिफ़्ट, बिगड़ी नींद, अचानक वज़न घटना या बढ़ना, क्रैश डाइटिंग और बहुत कड़ा व्यायाम, ये सब ओव्यूलेशन को कुछ समय के लिए टाल या रोक सकते हैं, और लंबी यात्रा भी यही कर सकती है। ट्रिगर गुज़र जाने पर पीरियड्स आमतौर पर ख़ुद पटरी पर लौट आते हैं। लेकिन अगर चक्र दो-तीन महीने से ज़्यादा बिगड़ा रहे, तो अनिश्चित इंतज़ार के बजाय जाँच करा लेना समझदारी है।
पीसीओएस: एक आम हार्मोनल कारण
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी पीसीओएस उन सबसे आम कारणों में से है जिनके चलते युवा महिलाएँ अनियमित पीरियड्स के लिए स्त्री-रोग विशेषज्ञ से मिलती हैं। पीसीओएस में हार्मोन का असंतुलन नियमित ओव्यूलेशन में बाधा डालता है, जिससे पीरियड्स कम, देर से या बेतरतीब आने लगते हैं। कई महिलाओं को मुहाँसे, चेहरे या शरीर पर ज़्यादा बाल, वज़न बढ़ना, या गर्दन और बग़लों की त्वचा का काला पड़ना भी नज़र आता है। पीसीओएस सँभाली जा सकने वाली स्थिति है, उम्रक़ैद नहीं। जीवनशैली में बदलाव और दवाओं का मेल, यह ध्यान में रखकर तय किया गया कि आप अभी गर्भधारण की कोशिश कर रही हैं या नहीं, कई महिलाओं को चक्र नियमित करने और अपनी लंबी सेहत सुरक्षित रखने में मदद करता है।
पहले आज़माई जाने वाली गोलियाँ, और वे क्या छिपा लेती हैं
पुणे के बहुत से घरों में डॉक्टर के पास जाने से पहले दो चीज़ें आज़माई जाती हैं। पहली, केमिस्ट के सुझाव पर या किसी रिश्तेदार के पुराने पर्चे से ली गई गोलियों का कोर्स, ताकि रुका हुआ पीरियड आ जाए। दूसरी, शादी, किसी पारिवारिक समारोह या सफ़र की तारीख से पीरियड आगे खिसकाने के लिए ली जाने वाली हॉर्मोन की गोलियाँ। इनमें कुछ भी शर्मनाक नहीं है, और दोनों अक्सर उस वक्त काम भी कर जाती हैं। दिक्कत यह है कि इस तरह लाया गया रक्तस्राव हमें यह लगभग कुछ नहीं बताता कि चक्र पहले गड़बड़ हुआ ही क्यों था। राहत असली होती है, वजह अनदेखी रह जाती है, और वही सिलसिला आमतौर पर लौट आता है।
दूसरी बात जो हम अक्सर सुनते हैं, वह यह कि शादी के बाद या बच्चे के बाद सब ठीक हो जाएगा। इसी तरह महीने दो साल में बदल जाते हैं। अगर आपके चक्रों ने साफ़ तौर पर अपना पुराना ढर्रा छोड़ दिया है, तो हर देर से आए महीने को अलग अलग सँभालने के बजाय एक बार वजह की ठीक से जाँच करा लीजिए। दो चीज़ें उस मुलाक़ात को कहीं ज़्यादा उपयोगी बना देती हैं। पिछले कुछ पीरियड की शुरुआत की तारीखें लिखकर लाइए, क्योंकि याददाश्त उन्हें गोल कर देती है, और जो भी दवा आप पहले ले चुकी हैं उसका पत्ता या नाम साथ लाइए। दोनों से समय बचता है और अक्सर एक दोबारा की जाँच भी बच जाती है।
थायरॉइड की समस्या और अन्य मेडिकल कारण
आपकी थायरॉइड ग्रंथि शरीर की कई प्रक्रियाओं की रफ़्तार तय करती है, मासिक चक्र भी इनमें शामिल है। थायरॉइड कम सक्रिय हो या ज़्यादा, दोनों ही स्थितियों में पीरियड्स ज़्यादा, कम, देर से या अनियमित हो सकते हैं, और एक साधारण ब्लड टेस्ट से यह समस्या पकड़ में आ जाती है। अन्य संभावित कारणों में बढ़ा हुआ प्रोलैक्टिन (Prolactin) स्तर, गर्भाशय के फ़ाइब्रॉइड या पॉलिप, कुछ दवाएँ, हाल का प्रसव और स्तनपान, और 40 की उम्र के बाद मेनोपॉज़ की ओर होने वाला प्राकृतिक हार्मोनल बदलाव शामिल हैं। किशोरियों में पीरियड्स शुरू होने के बाद चक्र को ठहरने में अक्सर एक-दो साल लग जाते हैं, जो आमतौर पर चिंता की बात नहीं है।
स्त्री-रोग विशेषज्ञ से कब मिलना चाहिए?
मोटे तौर पर नियम यह है: अगर पीरियड्स तीन महीने या उससे ज़्यादा समय से अनियमित हैं तो डॉक्टर से मिलें, और अगर पैटर्न आपको परेशान कर रहा है, तो उससे पहले भी। नीचे दिए संकेतों में से कोई भी दिखे, तो बिना देर किए अपॉइंटमेंट लें:
- तीन महीने से ज़्यादा समय तक पीरियड न आना
- चक्र 21 दिनों से छोटा या 35 दिनों से लंबा होना
- दो पीरियड्स के बीच या संबंध बनाने के बाद रक्तस्राव
- हर एक-दो घंटे में पैड पूरी तरह भीग जाना
- इतनी तेज़ ऐंठन कि रोज़ का कामकाज रुक जाए
- गर्भधारण की कोशिश के दौरान अनियमित चक्र
- मेनोपॉज़ के बाद किसी भी तरह का रक्तस्राव
एक स्थिति में अपॉइंटमेंट नहीं, तुरंत इलाज चाहिए: बहुत ज़्यादा रक्तस्राव के साथ चक्कर, कमज़ोरी, साँस फूलना या बेहोशी। ऐसे में तुरंत 108 पर कॉल करें या नज़दीकी इमरजेंसी विभाग पहुँचें।
कंसल्टेशन में क्या उम्मीद रखें
अनियमित पीरियड्स का कंसल्टेशन इत्मीनान भरा और सीधा-सादा होता है। आपकी स्त्री-रोग विशेषज्ञ चक्र का इतिहास, वज़न में बदलाव, तनाव, नींद, दवाएँ और बाक़ी लक्षण पूछेंगी, और ज़रूरत लगे तो थायरॉइड, ब्लड शुगर और हार्मोन स्तर जैसे साधारण ब्लड टेस्ट या पेल्विक अल्ट्रासाउंड (Pelvic Ultrasound) की सलाह दे सकती हैं। इलाज पूरी तरह कारण पर निर्भर करता है, इसीलिए सटीक निदान, घरेलू नुस्ख़ों या सहेली से उधार लिए प्रिस्क्रिप्शन से कहीं ज़्यादा मायने रखता है। अनियमित पीरियड्स के ज़्यादातर कारण सही पहचान होते ही अच्छी तरह ठीक हो जाते हैं, और जवाब मिल जाना अपने आप में लगभग हमेशा एक राहत होती है।
अगर आपका मासिक चक्र आपको परेशान कर रहा है, तो किसी विशेषज्ञ से खुलकर बात करना ही सही पहला क़दम है। 22 वर्षों के अनुभव वाली हमारी कंसल्टेंट स्त्री-रोग विशेषज्ञ डॉ. समता सिंघानिया प्रुडेंट क्लिनिक, विमान नगर, पुणे में मरीज़ों को देखती हैं। क्लिनिक सातों दिन, सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है, और वॉक-इन मरीज़ों का भी स्वागत है।





