Women's Healthपीरियड की तारीख़ निकल गई है और मन में बार-बार यही सवाल आ रहा है कि कहीं प्रेगनेंसी तो नहीं? यह सवाल जितना आम है, उतनी ही आम है इसके साथ जुड़ी घबराहट। बहुत सी महिलाएं गूगल पर pregnancy ke lakshan खोजती हैं और आधी-अधूरी जानकारी पढ़कर और उलझ जाती हैं।
इस लेख में हम आसान भाषा में समझेंगे कि प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण कौन से होते हैं, होम टेस्ट कब करना सही रहता है और किन स्थितियों में देर किए बिना डॉक्टर से मिलना चाहिए।
हर महिला का शरीर अलग होता है, इसलिए लक्षण भी सबमें एक जैसे नहीं होते। किसी को पीरियड मिस होते ही बदलाव महसूस होने लगते हैं, तो किसी को कई हफ़्तों तक कुछ खास पता नहीं चलता। फिर भी कुछ संकेत ऐसे हैं जो शुरुआती दिनों में सबसे ज़्यादा देखे जाते हैं।
इनमें से कोई एक लक्षण अकेले दिखे तो घबराने की ज़रूरत नहीं, पर पीरियड मिस होने के साथ दो-तीन संकेत मिलें तो टेस्ट करने का समय आ गया है।
होम प्रेगनेंसी टेस्ट (Home Pregnancy Test) पेशाब में एचसीजी (hCG) नाम के हार्मोन को पकड़ता है। सबसे सही नतीजा तब मिलता है जब आप पीरियड मिस होने के बाद टेस्ट करें। बहुत जल्दी टेस्ट करने पर हार्मोन की मात्रा कम होने से नतीजा गलत नेगेटिव आ सकता है। आजकल की किट काफ़ी भरोसेमंद होती हैं, बस सही समय और सही तरीक़े का ध्यान ज़रूरी है।
टेस्ट हमेशा सुबह की पहली पेशाब से करें, क्योंकि उस समय हार्मोन सबसे ज़्यादा गाढ़ा होता है। किट पर लिखे समय का पूरा पालन करें और नतीजा उसी समय-सीमा में पढ़ें। अगर नतीजा नेगेटिव है पर पीरियड फिर भी नहीं आया, तो तीन-चार दिन रुककर दोबारा टेस्ट करें।
यह समझना बहुत ज़रूरी है कि ऊपर बताए गए ज़्यादातर लक्षण अकेले प्रेगनेंसी की पुष्टि नहीं करते। थकान, जी मिचलाना, स्तनों में दर्द और मूड बदलना पीरियड आने से पहले भी हो सकता है। तनाव, नींद की कमी, थायरॉइड (Thyroid) की गड़बड़ी या वज़न में बदलाव से भी पीरियड देर से आ सकता है।
इसलिए सिर्फ़ लक्षणों के आधार पर कोई नतीजा न निकालें। पक्की जानकारी के लिए होम टेस्ट और ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से खून की जांच या सोनोग्राफी (Sonography) ही सही रास्ता है।
अगर होम टेस्ट पॉज़िटिव आया है, तो जल्दी ही किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से मिल लें। शुरुआती मुलाक़ात में डॉक्टर प्रेगनेंसी की पुष्टि करते हैं, ज़रूरी जांचें बताते हैं और फोलिक एसिड (Folic Acid) जैसी ज़रूरी दवाएं शुरू करवाते हैं, जो बच्चे के विकास के लिए बहुत काम की होती हैं।
अगर टेस्ट बार-बार नेगेटिव आ रहा है पर पीरियड दो हफ़्ते से ज़्यादा लेट है, तब भी डॉक्टर से मिलना चाहिए, ताकि देरी की असली वजह पता चल सके। याद रखें, इंटरनेट की जानकारी सिर्फ़ समझ बढ़ाने के लिए है, वह इलाज की जगह नहीं ले सकती।
कुछ स्थितियों में इंतज़ार करना ठीक नहीं। अगर टेस्ट पॉज़िटिव आने के बाद पेट के एक तरफ़ तेज़ दर्द हो, भारी ब्लीडिंग (Bleeding) हो, चक्कर आएं या कंधे तक दर्द जाए, तो उसी दिन डॉक्टर के पास जाएं। यह एक्टोपिक प्रेगनेंसी (Ectopic Pregnancy) का संकेत हो सकता है, जिसमें गर्भ बच्चेदानी के बाहर ठहर जाता है। यह स्थिति समय पर इलाज मांगती है।
बहुत तेज़ दर्द या बेहोशी जैसी हालत में देर न करें, तुरंत 108 पर एंबुलेंस बुलाएं। ऐसे समय में जल्दी पहुंचना ही सबसे समझदारी भरा क़दम है।
अगर आपका टेस्ट पॉज़िटिव आया है या प्रेगनेंसी के लक्षण समझ नहीं आ रहे, तो अकेले परेशान न हों। प्रुडेंट क्लिनिक, विमान नगर, पुणे में डॉ. समता सिंघानिया (MBBS, DNB स्त्री रोग) सातों दिन परामर्श के लिए उपलब्ध हैं। अपॉइंटमेंट के लिए +91 70287 22200 पर कॉल करें।
यह लेख सामान्य सेहत की जानकारी के लिए है, आपकी निजी मेडिकल सलाह नहीं। अपने लिए सही मार्गदर्शन के लिए कृपया किसी योग्य डॉक्टर से मिलें — हमारी टीम सातों दिन +91 70287 22200 पर उपलब्ध है।
About the author
Dr. Samta B Singhania
MBBS, DNB (Obstetrics & Gynecology), DGO · Gynecologist / Obstetrician, 22+ years' experience
Gynecologist-obstetrician with 22 years across women's health, pregnancy care, PCOS, menstrual disorders and first-line fertility treatment.
Consulting at Prudent International Health Clinic, Viman Nagar, Pune
पहला क़दम उठाइए
प्रुडेंट क्लिनिक, विमान नगर, पुणे में कंसल्ट करते हैं।